जनरेटर के कोटेशन में अक्सर ATS या पैरेललिंग पैनल लिखा होता है, जैसे सबको पता हो कि यह क्या है। यह गाइड फैसिलिटी मैनेजर, प्रोजेक्ट इंजीनियर और ठेकेदार के लिए है, जिन्हें तय करना है कि साइट पर ऑटोमैटिक ट्रांसफ़र स्विच, जनरेटर पैरेललिंग या दोनों चाहिए या नहीं। हर हिस्से के आखिर में सप्लायर और इलेक्ट्रीशियन से पूछने के सवाल दिए हैं।
ATS पैनल क्या करता है?
ऑटोमैटिक ट्रांसफ़र स्विच आपके लोड को दो सप्लाई के बीच बदलता है: मेन सप्लाई और जनरेटर। वह चार काम इसी क्रम में करता है।
- वह पहचानता है कि मेन सप्लाई चली गई है।
- वह जनरेटर को स्टार्ट होने का सिग्नल देता है।
- जनरेटर तैयार होते ही वह लोड को उस पर डाल देता है।
- मेन सप्लाई लौटने पर वह लोड वापस मेन पर ले जाता है और जनरेटर को बंद होने देता है।
सबसे ज़रूरी काम वही है जो दिखता नहीं। जनरेटर और मेन सप्लाई एक ही सर्किट को एक साथ कभी नहीं खिलाने चाहिए, जब तक कि इंटरलॉक वाली खास तौर पर बनी व्यवस्था न हो। गलत जुड़ा जनरेटर बिजली को वापस ग्रिड में भेज सकता है। इससे लाइन पर काम कर रहे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
ध्यान रखें. जनरेटर को कभी जुगाड़ की तार से बिल्डिंग या साइट के डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड में न लगाएं। योग्य इलेक्ट्रीशियन से सही चेंजओवर व्यवस्था लगवाएं।
ATS कब चाहिए और मैनुअल चेंजओवर कब काफ़ी है?
एक ही टेस्ट लगाएं: क्या जनरेटर को तब भी चालू होना है जब स्विच चलाने के लिए कोई मौजूद न हो? अगर हां, तो ATS चाहिए। अगर साइट पर हमेशा कोई रहता है और थोड़ा इंतज़ार चल सकता है, तो मैनुअल चेंजओवर काफ़ी हो सकता है।
| स्थिति | आम तौर पर क्या ठीक रहता है | वजह |
|---|---|---|
| रात में खाली साइट या बिल्डिंग | ATS | स्विच करने के लिए कोई नहीं है। |
| कोल्ड स्टोर, सर्वर रूम, मेडिकल या सेफ़्टी लोड | ATS | बिजली जाने पर नुकसान या खतरा होता है। |
| स्टाफ़ वाला साइट ऑफ़िस या कैंप | मैनुअल चेंजओवर या ATS | थोड़ा इंतज़ार चल सकता है। |
| किसी औज़ार या छोटे काम के लिए अस्थायी बिजली | अक्सर दोनों नहीं | जनरेटर ही अकेली सप्लाई है। |
अगर जनरेटर ही अकेली सप्लाई है, जैसे कई शुरुआती कंस्ट्रक्शन साइटों पर, तो बदलने के लिए दूसरी सप्लाई ही नहीं है। तब सही कनेक्शन और प्रोटेक्शन चाहिए, ATS नहीं। ऑटोमैटिक का मतलब बिना निगरानी भी है: मेन सप्लाई जाते समय सेट में काफ़ी ईंधन (देखें जनरेटर का ईंधन और रिफ़्यूलिंग प्लान) और चार्ज स्टार्टिंग बैटरी होनी चाहिए, इसलिए तय करें कि इन्हें कौन जांचेगा। कुछ भी किराये पर लेने से पहले पता करें कि आप किस स्थिति में हैं। किससे पूछना है, यह इंडस्ट्रियल साइट की उपकरण ज़रूरतें कैसे पता करें गाइड में है।
ATS में क्या जांचें: रेटिंग, पोल और ट्रांसफ़र टाइप
सप्लायर से ये पांच बातें लिखित में मांगें।
- एम्पीयर में करंट रेटिंग। ATS उतने करंट के लिए रेटेड होना चाहिए जितना आपका लोड खींचता है। जनरेटर की kVA से स्विच की रेटिंग का पता नहीं चलता। शॉर्ट-सर्किट सहन करने की रेटिंग भी पूछें, और इलेक्ट्रीशियन से पक्का करवाएं कि वह साइट के लिए ठीक है। kVA, kW और करंट का रिश्ता समझने के लिए जनरेटर का साइज़ कैसे तय करें पढ़ें।
- फ़ेज़ और पोल। ATS आपकी सप्लाई से मेल खाना चाहिए: सिंगल फ़ेज़ या थ्री फ़ेज़, और पोल की सही संख्या। पूछें कि न्यूट्रल भी स्विच होता है या नहीं। आपके इंस्टॉलेशन में यह क्यों मायने रखता है, यह आपका इलेक्ट्रीशियन बताएगा।
- वोल्टेज। यह साइट की सप्लाई से मेल खाना चाहिए।
- जनरेटर पर ऑटो-स्टार्ट। ATS सिर्फ़ उसी सेट को चालू कर सकता है जो उसके सिग्नल पर स्टार्ट होने के लिए बना हो। पूछें कि सेट में इसके कंट्रोल हैं या नहीं, और दोनों को कौन जोड़ेगा।
- ट्रांसफ़र टाइप। ओपन ट्रांज़िशन में लोड बदलते समय बिजली कुछ पल के लिए कटती है। क्लोज़्ड ट्रांज़िशन में बिजली नहीं कटती, पर उसके लिए सिंक्रोनाइज़िंग उपकरण चाहिए और नेटवर्क ऑपरेटर की मंज़ूरी भी लग सकती है। इलेक्ट्रीशियन से कन्फ़र्म करें।
ATS हो तब भी मेन सप्लाई जाने के बाद जनरेटर के स्टार्ट होकर स्थिर होने तक बिजली बंद रहती है। बैकअप के ज़्यादातर इस्तेमाल में थोड़ी देर का ब्रेक चल जाता है। कंप्यूटर, प्रोसेस कंट्रोल और दूसरे संवेदनशील लोड इसे नहीं झेल पाते। ऐसे लोड हों तो सप्लायर को बताएं और इलेक्ट्रीशियन से पूछें कि उन्हें कैसे बचाना है।
जनरेटर पैरेललिंग क्या है?
पैरेललिंग का मतलब है दो या ज़्यादा जनरेटर एक कॉमन बस पर साथ चलाना, ताकि वे लोड आपस में बांट लें।
जुड़ने से पहले सेटों को सिंक्रोनाइज़ करना ज़रूरी है। वोल्टेज, फ़्रीक्वेंसी और फ़ेज़ तीनों मेल खाने चाहिए। यह काम पैरेललिंग कंट्रोलर अपने आप करता है। बिना सिंक्रोनाइज़ किए दो सेट एक बस पर जोड़ने से सेटों और पूरे इंस्टॉलेशन को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसीलिए सेटों के आउटपुट केबल बस जोड़कर पैरेलल नहीं किए जाते।
एक बड़े जनरेटर की जगह दो सेट पैरेलल क्यों करें?
दूसरा टेस्ट लगाएं: क्या एक सेट छोटा पड़ता है, या एक के खराब होने पर बैकअप चाहिए? इनमें से कुछ भी सच हो तो पैरेललिंग पर विचार करें।
| वजह | पैरेललिंग से क्या मिलता है |
|---|---|
| एक सेट छोटा है | दो या ज़्यादा सेट मिलकर मांग पूरी करते हैं। |
| प्रोजेक्ट के दौरान मांग बदलती है | लोड के हिसाब से सेट जोड़े या हटाए जा सकते हैं। |
| बिजली बंद होना मंज़ूर नहीं | एक सेट बंद हो या सर्विस पर जाए तो बाकी कम लोड संभाल सकते हैं। |
रिडंडेंसी की भी सीमा है। बराबर क्षमता के दो सेट में से एक खराब हो, तो दूसरा सिर्फ़ अपनी क्षमता जितना लोड उठाता है। पहले से तय कर लें कि कौन से लोड हर हाल में चालू रहने हैं, और इलेक्ट्रीशियन के साथ यह तय करें।
स्थिर और सीधे लोड के लिए एक बड़ा सेट अब भी बेहतर चुनाव हो सकता है। पैरेललिंग में पैनल और कंट्रोल बढ़ते हैं, यानी कमीशन करने के लिए ज़्यादा उपकरण और खराब होने के ज़्यादा मौके। विकल्पों को साइट की ज़रूरत पर परखें। रेटिंग इसमें क्या फ़र्क डालती है, यह जानने के लिए प्राइम, स्टैंडबाय और कंटीन्यूअस जनरेटर रेटिंग देखें।
जनरेटर सुरक्षित तरीके से पैरेलल करने के लिए क्या चाहिए?
पैरेललिंग सिर्फ़ दो मशीनें नहीं, एक पूरा सिस्टम है। इसके लिए तीन चीज़ें चाहिए।
- मेल खाने वाले सेट। एक ही टाइप और मेक के सेट सबसे आसान रहते हैं। अलग-अलग सेट भी कभी-कभी पैरेलल हो सकते हैं, पर तभी जब सप्लायर कन्फ़र्म करे।
- पैरेललिंग पैनल और कंट्रोल स्कीम। सिंक्रोनाइज़िंग और लोड शेयरिंग यहीं होती है।
- योग्य इलेक्ट्रीशियन। जनरेटर या ATS को बिल्डिंग या साइट के डिस्ट्रीब्यूशन से जोड़ना उसी का काम है।
सप्लायर से पूछने के सवाल:
- क्या आप जो सेट दे रहे हैं वे आपस में पैरेलल हो सकते हैं? लिखित में कन्फ़र्म करें।
- क्या सेट के साथ पैरेललिंग पैनल और कंट्रोलर आते हैं, या हमें खुद लाना होगा?
- एक सेट ट्रिप हो जाए तो लोड का क्या होगा?
- साइट पर सिस्टम को कमीशन और टेस्ट कौन करेगा?
ज़रूरतें प्रोजेक्ट, साइट मालिक और अथॉरिटी के हिसाब से बदलती हैं। मोबिलाइज़ करने से पहले इन्हें पक्का कर लें।
ट्रांसफ़ॉर्मर कहां आता है?
कभी-कभी जनरेटर का वोल्टेज और साइट का वोल्टेज मेल नहीं खाते। ऐसे में ट्रांसफ़ॉर्मर दोनों के बीच पुल का काम कर सकता है।
इलेक्ट्रीशियन से शुरू में ही पूछ लें कि आपकी साइट को इसकी ज़रूरत है या नहीं। फिर सप्लायर से पूछें कि सही रेटिंग का ट्रांसफ़ॉर्मर जनरेटरों के साथ मिल सकता है या नहीं। सेट पहुंचने तक इसे न टालें।
Maedah पर यह कैसे करें
जनरेटर गेस्ट के तौर पर देखें और स्पेसिफ़िकेशन व शहर जांचें। किराये की बुनियादी बातों के लिए कंस्ट्रक्शन साइट के लिए जनरेटर किराये पर कैसे लें पढ़ें। या एक ही रिक्वेस्ट डालें, जिसमें सेटों की संख्या, शहर और नक्शे पर साइट, और तारीखें हों।
ज़रूरतों में लिखें कि आपको ATS चाहिए, या पैरेललिंग, या दोनों। जो ATS रेटिंग एम्पीयर में चाहिए, फ़ेज़ और वोल्टेज भी जोड़ दें। इस कैटेगरी की सप्लाई करने वाले और आपके शहर में सेवा देने वाले सप्लायर सीलबंद कोटेशन भेजते हैं। उन्हें साथ-साथ देखें: क्या शामिल है, जवाब देने का समय और रेटिंग। ऊपर के सवाल पूछने के लिए हर कोटेशन की चैट इस्तेमाल करें। कीमत और भुगतान सप्लायर से तय करें।





