मान लीजिए एक पुरानी मशीन के घंटे कम हैं पर साल पुराना है, और दूसरी नई है पर उसके घंटे बहुत ज़्यादा हैं। यह गाइड उस खरीदार के लिए है जिसे इन दोनों में से एक चुननी है। पुरानी मशीन के घंटे या साल का फ़ैसला किसी स्कोर से नहीं होता। यहां देखिए कि आवर मीटर कैसे जांचें, एक्सकेवेटर, जनरेटर और लिफ़्टिंग उपकरण में क्या मांगें, और सबूत के आधार पर दोनों मशीनों की तुलना कैसे करें।
आवर मीटर असल में क्या गिनता है?
ज़्यादातर मशीनों में आवर मीटर इंजन चलने का समय गिनता है। कौन सी चीज़ इसे चलाती है, यह मॉडल पर निर्भर है: इंजन चालू होना, चाबी ऑन होना, या कोई ड्राइव या लिफ़्ट फ़ंक्शन चलना। विक्रेता से पूछ लें कि इस मशीन में कौन सा लागू होता है। मीटर यह नहीं गिनता कि उस समय में कितना काम हुआ, और आइडलिंग आमतौर पर चलने में गिनी जाती है।
इसलिए दो मशीनों के घंटे बराबर हों तब भी हालत में बड़ा फ़र्क हो सकता है। एक मशीन साइट पर इंतज़ार करते हुए घंटों आइडल रही होगी और उसने बहुत कम काम किया होगा। दूसरी पूरे दिन ज़ोर लगाकर चली होगी। दूसरी के इंजन, हाइड्रोलिक और ड्राइव पार्ट्स पर कहीं ज़्यादा घिसावट होती है।
घंटे तभी असली इस्तेमाल बताते हैं जब आपको यह भी पता हो कि मशीन कैसे चलाई गई। इस गाइड का बाकी हिस्सा यही सबूत जुटाने के बारे में है।
साल से वह क्या पता चलता है जो घंटों से नहीं चलता?
कुछ पुर्ज़े इस्तेमाल से नहीं, समय से घिसते हैं। मशीन खड़ी रहे तब भी वे पुराने होते जाते हैं।
- सील, होज़ और बेल्ट सख़्त होकर चटक जाते हैं।
- रबर के पुर्ज़े सूख जाते हैं।
- वायरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स बिगड़ने लगते हैं और कनेक्टर में जंग लग जाती है।
- पेंट उखड़ता है और जंग शुरू हो जाती है, खासकर बाहर खड़ी रहने वाली मशीन पर।
जो मशीन लंबे समय तक बिना चले खड़ी रही, वह घंटे कम होने से "नई जैसी" नहीं हो जाती। उसके पुराने पड़ चुके पुर्ज़े बदलने के लायक हो सकते हैं। कम घंटों वाली पुरानी मशीन अच्छा सौदा भी हो सकती है, अगर उसकी देखभाल अच्छी हुई और समय से घिसने वाले पुर्ज़े बदले गए हों। यह अंदाज़े से नहीं, देखकर पता चलता है।
आवर मीटर की रीडिंग सही है, यह कैसे जांचें?
रीडिंग गलत हो सकती है। मीटर बदले जाते हैं, खराब होते हैं या उनके साथ छेड़छाड़ होती है। डैशबोर्ड के आंकड़े को जांचने वाला दावा मानें, पक्का तथ्य नहीं। जिन मशीनों में इंजन कंट्रोलर होता है, उनमें डीलर या सप्लायर की वर्कशॉप अक्सर उसमें दर्ज घंटों से मीटर का मिलान कर सकती है।
- सर्विस रिकॉर्ड मांगें। ऑयल और फ़िल्टर बदलने की एंट्री में आमतौर पर उस वक्त के घंटे लिखे होते हैं। आखिरी एंट्री मौजूदा रीडिंग के क़रीब होनी चाहिए।
- सर्विस स्टिकर पढ़ें। इंजन, फ़िल्टर हाउसिंग और केबिन पर लगे स्टिकर में अक्सर आखिरी सर्विस के घंटे होते हैं। देखें कि स्टिकर नया है और बाकी स्टिकरों जैसी ही लिखावट या फ़ॉर्मेट में है।
- घिसावट देखें। पैडल, सीट, जॉयस्टिक, स्विच, सीढ़ियां और हैंडरेल इस्तेमाल से घिसते हैं। ट्रैक वाली मशीन में ट्रैक और स्प्रॉकेट देखें, पहियों वाली मशीन में टायर।
- मीटर के बारे में पूछें। क्या वह कभी बदला या ठीक कराया गया है? अगर हां, तो बदलाव से पहले के घंटे दिखाने वाले कागज़ मांगें।
- घंटों को मशीन के सालों से भाग दें। जो नतीजा आए, उसे विक्रेता के बताए इस्तेमाल से मिलाएं। किसी भी तरफ़ बड़ा फ़र्क हो, जैसे पुरानी मशीन पर बहुत कम घंटे, तो उसकी सफ़ाई चाहिए।
- कहानी मिलाएं। घंटे, रिकॉर्ड और घिसावट, तीनों एक ही कहानी कहें।
ध्यान रखें. अगर घिसावट घंटों से बहुत ज़्यादा या बहुत कम दिखे, तो रुककर कारण पूछें। "मीटर बदला गया था" वाली बात बिना रिकॉर्ड के न मानें।
एक्सकेवेटर, जनरेटर और क्रेन में घंटे और साल कैसे अलग पढ़ें?
एक जैसे घंटों का मतलब अलग-अलग मशीनों में अलग होता है। इस टेबल से तय करें कि घंटों के साथ और क्या मांगना है।
| मशीन | घंटे क्या बताते हैं | साथ में क्या मांगें |
|---|---|---|
| एक्सकेवेटर (पोकलेन) | इंजन का समय, ऑपरेटर के इंतज़ार में आइडलिंग समेत | सर्विस रिकॉर्ड, हाइड्रोलिक की हालत, अंडरकैरेज और बकेट लिंकेज की घिसावट। |
| जनरेटर | किसी भी लोड पर इंजन चलने का समय | लोड का इतिहास और सर्विस रिकॉर्ड: हल्के लोड के घंटे और भारी लोड के घंटे एक जैसे नहीं होते। |
| लिफ़्टिंग उपकरण (क्रेन, लिफ़्टिंग प्लेटफ़ॉर्म, फ़ोर्कलिफ़्ट) | इंजन या ड्राइव के चलने का समय | इंस्पेक्शन और सर्टिफ़िकेशन का इतिहास, और यह कि इतनी पुरानी मशीन के पुर्ज़े आसानी से मिलते हैं या नहीं। |
एक्सकेवेटर में आवर मीटर जांच की सिर्फ़ शुरुआत है। पूरी मशीन की चरण-दर-चरण जांच के लिए पुराने एक्सकेवेटर की इंस्पेक्शन चेकलिस्ट पढ़ें।
जो जनरेटर अपने ज़्यादातर घंटे हल्के लोड पर चला, वह उस जनरेटर जैसा नहीं है जो अपनी हद के क़रीब चला। पूछें कि वह स्टैंडबाय पर था या बिजली का मुख्य स्रोत था। प्राइम, स्टैंडबाय और कंटीन्यूअस रेटिंग वाली गाइड यह फ़र्क समझाती है।
क्रेन, लिफ़्टिंग प्लेटफ़ॉर्म और फ़ोर्कलिफ़्ट में साल का असर कुछ और तरीकों से भी पड़ता है। वह स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन, सर्टिफ़िकेशन और पुर्ज़े मिलने की आसानी पर असर डालता है। कम घंटों वाली मशीन भी सर्टिफ़ाई या रिपेयर करना मुश्किल हो सकता है, अगर उसके पुर्ज़े कम मिलते हों।
इस्तेमाल की हुई लिफ़्टिंग मशीन को सिर्फ़ घंटों के भरोसे काम पर न लगाएं। इंस्पेक्शन और सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरतें साइट के मालिक, म्युनिसिपैलिटी और बीमा कंपनी के हिसाब से अलग होती हैं, इसलिए इस्तेमाल से पहले पुष्टि कर लें। देखें लिफ़्टिंग उपकरण के इंस्पेक्शन सर्टिफ़िकेट में क्या जांचें। यह भी देखें कि लोड चार्ट और रेटेड कैपेसिटी के निशान मौजूद और पढ़ने लायक हैं।
घंटे, साल या मेंटेनेंस का रिकॉर्ड: कौन सा ज़्यादा मायने रखता है?
मेंटेनेंस का रिकॉर्ड आमतौर पर सबसे मज़बूत संकेत होता है। नियमित ऑयल और फ़िल्टर बदलना और दर्ज की गई मरम्मत, अकेले किसी भी आंकड़े से ज़्यादा बताते हैं। ज़्यादा घंटों वाली मशीन, जिसका पूरा रिकॉर्ड हो, उस मशीन से ज़्यादा सुरक्षित चुनाव हो सकती है जिसके घंटे कम हों पर कोई इतिहास न हो।
काम की हालत भी मायने रखती है। आसान हालात में उतने ही घंटों की तुलना में ये चीज़ें मशीन को जल्दी घिसाती हैं:
- गर्म मौसम।
- धूल और रेत।
- सख़्त चट्टान या रगड़ पैदा करने वाली ज़मीन।
- भारी ड्यूटी साइकिल, जैसे लगातार खुदाई या क्षमता के क़रीब लगातार उठाना।
सऊदी अरब में गर्मी और धूल रोज़ के काम का हिस्सा हैं। पूछें कि मशीन कहां काम करती रही और उसे कैसे रखा गया। धूल, रेत और ओवरहीटिंग वाली गाइड बताती है कि ये चीज़ें मशीन पर क्या असर डालती हैं और अच्छी देखभाल कैसी दिखती है।
नोट. हर मशीन के लिए घंटों या सालों का कोई एक "अच्छा" आंकड़ा नहीं होता। उसी मॉडल की मिलती-जुलती मशीनों से और निर्माता के सर्विस अंतराल से तुलना करें।
दो पुरानी मशीनों की तुलना का आसान तरीका
दोनों आंकड़ों को स्कोर न दें। सबूत आमने-सामने रखें। मिसाल के तौर पर, मशीन A के घंटे कम हैं और वह पुरानी है। मशीन B नई है पर उसके घंटे ज़्यादा हैं। सप्लायर से दोनों के बारे में एक ही सवाल पूछें:
- क्या सर्विस रिकॉर्ड आवर मीटर की रीडिंग से मेल खाते हैं?
- क्या ऑयल और फ़िल्टर समय पर बदले गए?
- समय से घिसने वाले कौन से पुर्ज़े, जैसे होज़, सील और बेल्ट, बदले गए?
- मशीन किन हालात में काम करती रही और उसे कैसे रखा गया?
- क्या कंट्रोल, ट्रैक या टायर की घिसावट घंटों से मेल खाती है?
- लिफ़्टिंग उपकरण में, क्या इंस्पेक्शन का इतिहास पूरा है?
फिर इस तरह फ़ैसला करें:
- जिस मशीन के घंटों को आप रिकॉर्ड या घिसावट से साबित न कर सकें, उसे छोड़ दें।
- जिसका मेंटेनेंस इतिहास ज़्यादा साफ़ हो, उसे तरजीह दें।
- लिखें कि हर एक को आगे क्या चाहिए: A में पुराने पड़ चुके पुर्ज़ों का बदलाव, B में घिसे हुए कंपोनेंट।
- अगर फिर भी दोनों क़रीब लगें, तो पक्का करने से पहले किसी योग्य मैकेनिक या इंस्पेक्टर से दोनों की जांच कराएं। फ़्लुइड सैंपलिंग और लोड में टेस्ट रन से और सबूत मिलते हैं।
पूरी प्रक्रिया के लिए पुराने हेवी इक्विपमेंट की खरीद, क़दम-दर-क़दम देखें। अगर आपको यही पक्का नहीं कि पुरानी मशीन लेनी भी चाहिए या नहीं, तो नई बनाम पुरानी हेवी मशीन पढ़ें। हर मशीन की चलाने की लागत हेवी इक्विपमेंट की ऑपरेटिंग लागत किन चीज़ों से तय होती है में समझाई गई है।
Maedah पर यह कैसे करें
Maedah पर आप बिक्री और किराये की मशीनें एक ही जगह देख सकते हैं। हर लिस्टिंग में फ़ोटो, स्पेसिफ़िकेशन और शहर दिखता है। सप्लायर से बात करते समय आवर मीटर की रीडिंग, सर्विस रिकॉर्ड और लिफ़्टिंग उपकरण के लिए इंस्पेक्शन का इतिहास मांगें।
पक्का नहीं कि क्या उपलब्ध है? मशीन, शहर और अपनी ज़रूरतों के साथ रिक्वेस्ट डालें। जो सप्लायर वह कैटेगरी देते हैं और उस शहर में सेवा देते हैं, वे कोटेशन भेज सकते हैं। उन्हें आमने-सामने रखकर तुलना करें, और कीमत और भुगतान सप्लायर से आपस में तय करें।






