प्रोजेक्ट की आख़िरी तारीख़ वही रहती है, पर रमज़ान और गर्मी में निर्माण कार्य का शेड्यूल बदलने से काम के असली घंटे घट जाते हैं। यह गाइड साइट मैनेजर और कॉन्ट्रैक्टरों के लिए है, जिन्हें इस शेड्यूल को मशीन प्लान में बदलना है। इससे तीन फ़ैसले तय होते हैं: कितनी मशीनें लगेंगी, नाइट शिफ़्ट जोड़नी है या नहीं, और हायर रिक्वेस्ट में क्या लिखना है।
रमज़ान और गर्मी में साइट पर काम के घंटे कैसे बदलते हैं?
रमज़ान इस्लामी चंद्र कैलेंडर से चलता है, इसलिए हर साल यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में दस से ग्यारह दिन पहले आता है। इसलिए पिछले साल की तारीख़ें नहीं दोहराई जा सकतीं। शेड्यूल उसी साल की पुष्टि हुई तारीख़ों से बनाएं।
दोनों मौसम की समस्याएँ अलग हैं। रमज़ान में मुख्य रूप से काम का समय और क्रू की उपलब्धता बदलती है। गर्मी में यह तय होता है कि मशीनें, लोग और कंक्रीट कितना झेल सकते हैं।
रमज़ान में काम के घंटे, और गर्मी में बाहर के काम पर कोई रोक हो तो वह भी, सरकारी नियमों, क्लाइंट और कॉन्ट्रैक्ट से तय होते हैं। ये बदल सकते हैं। शेड्यूल तय करने से पहले अपने प्रोजेक्ट पर अभी लागू नियम पक्के कर लें। साइट पर सुने गए घंटों या किसी पुराने दस्तावेज़ के आधार पर योजना न बनाएँ।
शेड्यूल तय करने से पहले क्लाइंट और कॉन्ट्रैक्ट से ये जवाब लें:
- हर अवधि के लिए साइट पर काम के घंटे, और बदलाव लिखित में कौन पक्का करेगा।
- गर्मी के महीनों में बाहर के काम पर कोई रोक है या नहीं।
- इस साइट पर दूसरी या नाइट शिफ़्ट की इजाज़त है या नहीं।
- ट्रक और लो-लोडर की डिलीवरी और वापसी के नियम क्या हैं (नीचे डिलीवरी वाला हिस्सा देखें)।
इसके बाद तय करें कि हर मशीन रोज़ असल में कितने घंटे और किस समय काम कर सकती है। आगे का पूरा हिसाब इसी जवाब पर टिका है।
कम घंटे या बदली शिफ़्ट में कितनी मशीनें लगेंगी?
मशीन का आउटपुट उसके रोज़ के असली काम के घंटों पर निर्भर है। पहला अनुमान इस तरह लगाएं: मशीन-दिन = काम के कुल घंटे ÷ एक मशीन के रोज़ के असली घंटे। यह लगभग सीधे अनुपात में चलता है। सेट-अप, ईंधन भरने और हैंडओवर में लगने वाले समय से असली आउटपुट थोड़ा अलग होगा, इसलिए थोड़ा मार्जिन रखें।
उदाहरण के लिए, मान लें एक ट्रेंच के काम में 60 एक्सकेवेटर-घंटे लगते हैं, और आपने रोज़ 6 घंटे के हिसाब से 10 दिन का प्लान बनाया है। अगर असली घंटे घटकर रोज़ 4 रह जाएँ, तो एक ही एक्सकेवेटर से वही काम 15 दिन में होगा। 10 दिन में ही करना हो तो एक दूसरा एक्सकेवेटर लें या अतिरिक्त शिफ़्ट लगाएं।
विकल्प चुनते समय इन्हें देखें:
| विकल्प | कब सही है | किस बात पर ध्यान दें |
|---|---|---|
| वही मशीनें, काम की अवधि लंबी | जब अंतिम तारीख़ आगे खिसक सकती हो | अगले काम की टीम का देर से शुरू होना; हायर की अवधि लंबी होना। |
| ज़्यादा मशीनें | जब तारीख़ तय हो और साइट पर जगह हो | जगह, ट्रैफ़िक, ऑपरेटर और सुपरविज़न। |
| नाइट शिफ़्ट | जब तारीख़ तय हो और अंधेरे में काम सुरक्षित हो सके | रोशनी, शोर, थकान और दूसरी टीम के ऑपरेटर। |
मशीनों की गिनती का पूरा तरीका देखने के लिए प्रोजेक्ट के लिए कितनी मशीनें चाहिए, इसका आसान हिसाब पढ़ें।
सुझाव. मशीनें जोड़ने से पहले जाँच लें कि हर मशीन के पास सामग्री, जगह और खुला काम का क्षेत्र है।
रात के काम के लिए क्या चाहिए, और सप्लायर से क्या पूछें?
रात का काम सिर्फ़ मशीन चालू करने से नहीं होता। इन चीज़ों की योजना बनाएं:
- टावर लाइट, ताकि पूरा काम का क्षेत्र और मशीन का रास्ता रोशन रहे।
- लाइट के लिए पावर। कई टावर लाइट में अपना इंजन और ईंधन टैंक होता है, और कुछ अलग जनरेटर से चलती हैं। पूछें कि आपको कौन सी मिल रही है, उसमें ईंधन कौन भरेगा और कितनी बार।
- चिह्नित काम की जगह, जिसमें बैरियर, साइन बोर्ड और पैदल चलने वालों के लिए साफ़ रास्ते हों।
- घरों के पास शोर की सीमा की जाँच। यह नगरपालिका, क्लाइंट या कॉन्ट्रैक्ट से तय हो सकती है, इसलिए रात का काम पक्का करने से पहले पूछ लें।
- पैदल चलने वाले सभी लोगों के लिए हाई-विज़िबिलिटी कपड़े। रात में भी किसी लिफ़्ट के लिए वही सामान्य लिफ़्ट प्लान और निर्माता का लोड चार्ट चाहिए।
रोशनी की योजना कैसे बनाएं, इसके लिए रात के काम के लिए टावर लाइट पढ़ें। Maedah पर टावर लाइट और जनरेटर देखें।
मशीन आने से पहले सप्लायर से ये पूछें:
- एक हायर दिन या एक शिफ़्ट में कितने घंटे शामिल हैं?
- क्या नाइट शिफ़्ट को अलग शिफ़्ट गिना जाएगा?
- अतिरिक्त घंटे और ओवरटाइम का चार्ज कैसे लगेगा, और उन्हें कौन दर्ज करेगा?
- क्या ऑपरेटर के घंटे शिफ़्ट में आते हैं, और दूसरी शिफ़्ट के लिए दूसरा ऑपरेटर चाहिए?
- लाइट, जनरेटर और ईंधन कौन देगा?
- शिफ़्ट बदलते समय ईंधन कौन भरेगा, मशीन कौन जाँचेगा और घंटे कौन दर्ज करेगा?
- अगर मशीन दो शिफ़्ट चलती है, तो सर्विस कौन करेगा, और सर्विस किस आवर-मीटर अंतराल पर होगी? दो शिफ़्ट में घंटे तेज़ जुड़ते हैं, इसलिए सर्विस की बारी जल्दी आती है।
- रमज़ान और ईद की छुट्टियों में ब्रेकडाउन की कॉल कौन उठाएगा, और तब सप्लायर के अपने काम के घंटे क्या हैं?
नाइट शिफ़्ट को अलग शिफ़्ट गिना जा सकता है, उसी दिन के अतिरिक्त घंटे नहीं। यह परिभाषा फ़ोन कॉल पर नहीं, कोटेशन में लिखवाएं। कोटेशन में देखने वाली बाकी शर्तों के लिए इक्विपमेंट रेंटल रेट में क्या शामिल है और क्या नहीं पढ़ें।
गर्मी मशीनों, जनरेटर और लोगों पर क्या असर डालती है?
गर्म हवा में इंजन और हाइड्रॉलिक सिस्टम ज़्यादा गर्म होते हैं। धूल रेडिएटर और फ़िल्टर बंद कर देती है, जिससे यह और बिगड़ता है। गर्मी में कूलेंट, तेल का स्तर और फ़िल्टर ज़्यादा बार जाँचें, और जहाँ हो सके मशीनें छाँव में खड़ी करें। पूरी जाँच का तरीका जानने के लिए हेवी इक्विपमेंट ओवरहीटिंग और धूल की जाँच देखें।
आसपास का तापमान बढ़ने पर जनरेटर का आउटपुट घटता है। सिर्फ़ नेमप्लेट के आंकड़े पर भरोसा न करें। सप्लायर से उस सेट की रेटिंग आपकी साइट की हालत पर माँगें, और यह भी पूछें कि उस रेटिंग पर सेट कितना लोड उठा सकता है।
लोगों के लिए भी योजना चाहिए। क्रू और आराम की जगहों के लिए छाँव, पीने का पानी और साइट कूलर और पंखे दें। गर्मी से बचाव के उपाय साइट की सेफ़्टी प्लान का हिस्सा होने चाहिए। क्लाइंट या साइट ओनर अपने नियम भी तय कर सकते हैं, इसलिए काम शुरू करने से पहले उन्हें पक्का कर लें।
कौन से काम ठंडे घंटों में करें?
जो काम लोगों, सामग्री या मशीनों पर ज़्यादा बोझ डालता है, उसे ठंडे घंटों में रखें। पहले यह तालिका देखकर छाँटें:
| काम | ठंडे घंटों में क्यों ठीक है | कौन तय करता है |
|---|---|---|
| कंक्रीट डालना | गर्मी में कंक्रीट जल्दी सेट होती है | इंजीनियर और रेडी-मिक्स सप्लायर मिक्स और क्योरिंग प्लान तय करते हैं। |
| भारी हाथ का काम | गर्मी में क्रू जल्दी थकते हैं | साइट की सेफ़्टी प्लान। |
| लंबे समय तक चलने वाला मशीन का काम | इंजन और हाइड्रॉलिक सिस्टम ज़्यादा गर्म होते हैं और ऑपरेटर थकते हैं, इसलिए जाँच और मशीन ठंडी होने के लिए ब्रेक रखें | सप्लायर की मेंटेनेंस सलाह और साइट की सेफ़्टी प्लान। |
सिर्फ़ इसलिए रात में काम न ले जाएँ कि रात में गर्मी कम होती है। अगर रोशनी या शोर के नियम उसे असुरक्षित बनाते हैं या अनुमति नहीं देते, तो काम दिन में ही रखें।
क्या डिलीवरी और वापसी का समय भी बदलना होगा?
हाँ। लो-लोडर पर लदी मशीन को पहुँचने, उतरने और जाँच होने में समय लगता है, और तब तक उससे कोई काम नहीं होता। भारी गाड़ियों पर सीमाएँ शहर, सड़क और प्रोजेक्ट के हिसाब से अलग हो सकती हैं, इसलिए साइट ओनर, सप्लायर और ट्रांसपोर्ट कंपनी से पूछें कि कौन से समय के स्लॉट लागू होते हैं। फिर:
- पहुँचने का समय असली काम के घंटों की शुरुआत में बुक करें, ताकि मशीन उसी दिन काम कर सके।
- गेट पर कौन लेगा और डिलीवरी स्लिप पर कौन साइन करेगा, इसका नाम तय करें।
- पूछें कि हायर आपके आख़िरी काम के दिन ख़त्म होता है या मशीन साइट से निकलने पर।
- वापसी का समय भी इसी तरह तय करें, और शिफ़्ट का ढाँचा उसी संदेश में रखें।
जलवायु और लॉजिस्टिक्स शहर के हिसाब से अलग हैं। सऊदी अरब के अलग-अलग क्षेत्रों में क्या फ़र्क़ है, यह भी देखें।
Maedah पर रिक्वेस्ट कैसे भेजें और कोटेशन कैसे देखें?
रिक्वेस्ट फ़ॉर्म खोलें। हर मशीन उसकी संख्या के साथ जोड़ें, साइट का शहर और जगह नक्शे पर चुनें, और तारीख़ें डालें।
शिफ़्ट का ढाँचा, हर शिफ़्ट के घंटे और हर शिफ़्ट के लिए ऑपरेटर की ज़रूरत लिखें। लाइट, जनरेटर या कूलर भी उसी प्रोजेक्ट रिक्वेस्ट में जोड़ें। अगर पुष्ट हुए रमज़ान या गर्मी के नियम बदलते हैं, तो तारीख़ें बदल सकती हैं, यह लिखें। प्रोजेक्ट बढ़ सकता है तो वह भी बताएं, ताकि हर सप्लायर एक ही काम पर कोटेशन दे।
सील्ड कोटेशन आने पर उन्हें साथ-साथ रखकर तुलना करें: हर शिफ़्ट में क्या शामिल है, अतिरिक्त घंटे कैसे लिए जाते हैं, और लाइट व ईंधन कौन देता है। कोटेशन की चैट में सवाल पूछें, और अंतिम शर्तें सप्लायर से सीधे तय करें।







