खुदाई, पाइलिंग और ड्रिलिंग

कितने टन का एक्सकेवेटर चाहिए? काम से साइज़ चुनें

एक्सकेवेटर टन से नहीं, काम से चुनें: गहराई और पहुँच, ट्रक की लोडिंग, लिफ्टिंग, रास्ता, जगह, ज़मीन और ट्रांसपोर्ट मिलकर साइज़ क्लास तय करते हैं।

मुख्य बातें

  • गहराई, पहुँच, ट्रक की लोडिंग और लिफ्टिंग से सबसे छोटी मशीन तय होती है। रास्ता, जगह, ज़मीन और ट्रांसपोर्ट से सबसे बड़ी। इस दायरे में वह सबसे छोटी क्लास लें जो रोज़ की मात्रा पूरी करे।
  • स्पेक शीट की अधिकतम गहराई और अधिकतम पहुँच काफ़ी नहीं है। अपनी गहराई पर डिग एनवेलप पढ़ें और मार्जिन रखें।
  • बकेट ट्रक के हिसाब से लें। बड़े ट्रक के साथ छोटी बकेट हो तो ट्रक खड़ा इंतज़ार करता है।
  • बड़ा हमेशा बेहतर नहीं होता। तंग नाली में, दीवार के पास या कमज़ोर ज़मीन पर छोटी मशीन अक्सर बेहतर चलती है।
  • उठाने का काम सिर्फ़ मेकर के लिफ्टिंग चार्ट के भीतर करें, और बुकिंग से पहले ट्रांसपोर्ट का वज़न और साइज़ देख लें।

कितने टन का एक्सकेवेटर चाहिए, यह सवाल तब आता है जब खुदाई का काम तय है पर मशीन की क्लास तय नहीं। छोटी नालियों और प्लॉट के काम अक्सर मिनी या मिडी क्लास में हो जाते हैं। बड़े गड्ढों और दिन भर ट्रक भरने के लिए स्टैंडर्ड या बड़ी क्लास लगती है। नीचे के कदम आपको दो हदें देते हैं: सबसे छोटी मशीन जो काम कर दे, और सबसे बड़ी जो साइट में आ सके।

एक्सकेवेटर का साइज़ कैसे तय होता है, और टन का क्या मतलब है?

एक्सकेवेटर की क्लास उसके ऑपरेटिंग वेट (टन में) से बनती है। आम तौर पर यह काम के लिए तैयार मशीन का वज़न है: तेल-पानी, स्टैंडर्ड बकेट और ऑपरेटर समेत, पर कंपनियों में फ़र्क़ होता है। वज़न से गहराई, पहुँच और बकेट का साइज़ बढ़ता है। साथ ही बड़ा ट्रेलर और मज़बूत ज़मीन भी चाहिए।

क्लास की सीमाएँ हर मेकर अलग खींचता है, इसलिए नीचे के आँकड़े मोटे अंदाज़े हैं।

क्लासवज़न (लगभग)अधिकतम खुदाई गहराई (आम तौर पर)बकेट (आम तौर पर)आम काम
मिनी या कॉम्पैक्टलगभग 6 t तकलगभग 3.5 m तकलगभग 0.3 m³ से कमसर्विस की तंग नालियाँ, यार्ड और बगीचे का काम
मिडीलगभग 6-15 tलगभग 3.5-5.5 mलगभग 0.3-0.8 m³घर की नींव, लंबी नालियाँ, छोटे तालाब
स्टैंडर्डलगभग 15-30 tलगभग 5.5-7 mलगभग 0.8-1.5 m³बेसमेंट, बड़े गड्ढे, लगातार ट्रक भराई
बड़ीलगभग 30 t से ऊपरलगभग 7 m और ज़्यादालगभग 1.5 m³ से ऊपरबड़ा अर्थवर्क, दिन भर ट्रक भराई

यह सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा है। असली फ़ैसला उसी मॉडल की स्पेक शीट और चार्ट देखकर करें।

मिसाल के तौर पर, 3 t की मशीन मिनी है, 13 t की मिडी और 20 t की स्टैंडर्ड। 30 t की मशीन स्टैंडर्ड और बड़ी क्लास की सरहद पर आती है।

छोटी मशीनों के लिए मिनी एक्सकेवेटर देखें, और बड़ी के लिए एक्सकेवेटर (पोकलेन)। लोडर और बैकहो भी तौल रहे हैं? तो पढ़ें कौन सी अर्थमूविंग मशीन कौन सा काम करती है।

कितना गहरा और कितनी दूर खोदना है? डिग एनवेलप पढ़ें

हर स्पेक शीट में डिग एनवेलप होता है। यह एक नक्शा है जिसमें अधिकतम गहराई, ज़मीन के स्तर पर अधिकतम पहुँच और डंप की ऊँचाई दिखती है। ये सबसे अच्छी हालत के आँकड़े हैं।

पहुँच आम तौर पर मशीन के घूमने के केंद्र (स्विंग सेंटर) से नापी जाती है, ट्रैक या नाली के किनारे से नहीं। आप भी उसी बिंदु से नापें, वरना मशीन छोटी पड़ जाएगी।

दोनों अधिकतम आँकड़े एक ही जगह नहीं मिलते। चार्ट बताता है कि हर गहराई पर कितनी पहुँच मिलती है, और खुदाई गहरी होने पर पहुँच घटती जाती है। सप्लायर से चार्ट माँगें और अपनी गहराई पर पहुँच पढ़ें।

  1. सबसे गहरी कटाई लिखें, और स्विंग सेंटर से दूर वाले किनारे तक की दूरी भी।
  2. इस दूरी में मिट्टी के ढेर की जगह जोड़ें, और यह भी कि ट्रैक किनारे से पीछे रहें।
  3. ऐसे मॉडल चुनें जिनका चार्ट आपकी गहराई और दूरी, दोनों को साफ़ कवर करे, सिर्फ़ एक को नहीं।

मिसाल के तौर पर, 3 m गहरी नाली में स्विंग सेंटर से दूर के किनारे तक 4 m है। तो चार्ट में 3 m की गहराई पर देखें कि पहुँच कम से कम 4 m दिखती है, और ऊपर से मार्जिन भी बचता है।

खुदाई से पहले ज़मीन के नीचे की सर्विसेज़ का पता लगाएँ: पानी, बिजली, टेलीकॉम और सीवर। इनका रिकॉर्ड साइट के मालिक या संबंधित यूटिलिटी के पास होता है, और वह अधूरा भी हो सकता है।

ध्यान रखें. कटे हुए किनारों को साइट के सेफ्टी नियमों और इंजीनियर के कहे अनुसार ढलान, शोरिंग या ट्रेंच बॉक्स से सँभालना चाहिए। बिना सहारे वाली नाली में कोई भी न उतरे।

कितनी मिट्टी और कौन से ट्रक: बकेट का साइज़ और लोडिंग

पहले हटाई जाने वाली मिट्टी की मात्रा और उपलब्ध दिन जोड़ें। मात्रा को दिनों से भाग दें तो रोज़ की मात्रा निकलती है। सप्लायर को यही आँकड़ा, ट्रक का साइज़ और साइट की सीमाएँ बताएँ।

बकेट की क्षमता घन मीटर में लिखी होती है। डंप की ऊँचाई ट्रक की दीवार से ऊपर रहनी चाहिए। लोडिंग की लय इससे बनती है कि ट्रक कितने बकेट में भरता है: हर अतिरिक्त बकेट में पूरा खोदो-घुमाओ-गिराओ चक्र लगता है, और ट्रक रुका रहता है।

कम बकेट में ट्रक जल्दी भरता है, पर इतनी बड़ी मशीन साइट में आ भी जाए, यह ज़रूरी नहीं। मिसाल के तौर पर, डंप ट्रक में लगभग 10 घन मीटर आता है और बकेट लगभग 1 घन मीटर की है। बकेट शायद ही कभी पूरी रेटेड क्षमता तक भरती है, इसलिए दस से ज़्यादा बकेट लगेंगे। सप्लायर से पूछें कि यह लय आपके ट्रकों और रोज़ की मात्रा के लिए ठीक है या बड़ी बकेट अथवा छोटा डंप ट्रक बेहतर रहेगा।

भारी गीली मिट्टी या पत्थर में ट्रक भरने से पहले ही अपनी वज़न-सीमा छू सकता है। इसलिए भराई सिर्फ़ आयतन से नहीं, वज़न से भी देखें।

लय बहुत धीमी हो तो क्लास तभी बढ़ाएँ जब साइट उसे सँभाल सके, वरना छोटा ट्रक लें। खोदने पर मिट्टी फूल जाती है, इसलिए ट्रक के फेरे गड्ढे के आयतन से ज़्यादा लगेंगे।

भरी हुई बकेट को ट्रक की केबिन या लोगों के ऊपर से कभी न घुमाएँ।

क्या मशीन अंदर आ सकती है, जगह में चल सकती है और ज़मीन पर टिकेगी?

चुनने से पहले तीन चीज़ें नापें।

  • रास्ता: अंदर आते समय सबसे तंग गेट या रैंप।
  • जगह: केबिन और काउंटरवेट (टेल स्विंग) के घूमने की जगह। पास की दीवार मशीन को रोक सकती है।
  • ज़मीन: नीचे नरम रेत, भराव, स्लैब या पाइप। भारी मशीन धँस सकती है, झुक सकती है या नीचे की चीज़ तोड़ सकती है।

रिड्यूस्ड या ज़ीरो टेल-स्विंग मॉडल में केबिन घूमते समय पिछला हिस्सा ट्रैक की चौड़ाई के भीतर या उसके क़रीब रहता है। बाउंड्री दीवार के पास यह काम आता है; सप्लायर से आगे के स्विंग के बारे में भी पूछें। ऊपर की बिजली की तारों को बूम और डंप की ऊँचाई से मिलाकर देखें, और क्लीयरेंस के नियम साइट के मालिक से पूछें।

यह मानकर न चलें कि स्लैब, ढक्कन या दबा हुआ पाइप मशीन का वज़न झेल लेगा। ज़मीन की क्षमता साइट का मालिक या इंजीनियर बता सकता है। नरम रेत या भराव पर ट्रैक की चौड़ाई पूछें और यह भी कि मैट चाहिए या नहीं। सख़्त या पथरीली ज़मीन पर हाइड्रोलिक ब्रेकर कैरियर के वज़न और हाइड्रोलिक्स से मेल खाना चाहिए; देखें एक्सकेवेटर अटैचमेंट गाइड और ब्रेकर, रिपर या रॉक ड्रिल में से क्या चुनें। गर्मी और धूल वाले काम के लिए सर्विस रिकॉर्ड और रेडिएटर व एयर-फ़िल्टर की आख़िरी सफ़ाई के बारे में पूछें (धूल, रेत और ओवरहीटिंग से मशीन की सुरक्षा)।

क्या मशीन से पाइप या भार उठाना है? लिफ्टिंग कैपेसिटी देखें

खुदाई की ताक़त और उठाने की क्षमता दो अलग रेटिंग हैं। उठाना मेकर के लिफ्टिंग कैपेसिटी चार्ट से चलता है। भार मशीन से जितना दूर जाता है, क्षमता उतनी घटती है, और यह इस पर भी टिकी है कि कौन सा बूम, आर्म और अटैचमेंट लगा है।

उठाने से पहले ये जाँचें:

  • भार का वज़न, और वह जगह जहाँ उसे रखना है, वहाँ तक की दूरी।
  • मेकर इस मॉडल से उठाने की इजाज़त देता है, उसमें रेटेड लिफ्टिंग पॉइंट है और ज़रूरी सेफ्टी डिवाइस लगे हैं।
  • हिच और स्लिंग लोड-रेटेड हैं, जाँची हुई हैं और उन पर निशान लगा है (देखें रिगिंग की बुनियादी बातें)।
  • प्रशिक्षित ऑपरेटर और सिग्नलमैन लिफ्ट प्लान के हिसाब से काम करें, और भार के नीचे कोई न हो।

ध्यान रखें. भार को बकेट के दाँतों से, या बकेट अथवा आर्म पर चेन लपेटकर न लटकाएँ। सिर्फ़ मेकर का दिया रेटेड लिफ्टिंग पॉइंट और रेटेड हिच इस्तेमाल करें। अगर चार्ट आपके भार और पहुँच को साफ़ कवर नहीं करता, तो क्रेन लें।

मशीन साइट तक कैसे पहुँचेगी? वज़न और ट्रांसपोर्ट

एक्सकेवेटर आम तौर पर लोबेड पर जाते हैं। बुकिंग से पहले ट्रांसपोर्टर और सप्लायर से ये बातें लें:

  • लोड के साथ वज़न। बकेट या अटैचमेंट हटाने-जोड़ने पर यह ऑपरेटिंग वेट से अलग होता है।
  • ट्रांसपोर्ट की चौड़ाई और ऊँचाई, बूम मुड़ा हुआ।
  • उतारने की जगह। वह मज़बूत और समतल हो, और ट्रेलर के लिए जगह हो।
  • रूट की मंज़ूरी। चौड़े या भारी सड़क-ट्रांसपोर्ट में लग सकती है, और रूट व अथॉरिटी के हिसाब से अलग होती है।
  • लोडिंग-अनलोडिंग कौन करेगा, और साइट पर कौन मौजूद रहेगा।

देखें लोबेड प्री-ट्रिप चेकलिस्ट।

कितने टन का एक्सकेवेटर चाहिए: सारी जाँचें एक क्लास में कैसे जोड़ें?

सारी जाँचों को तीन कदमों में जोड़ें:

  1. जो क्लास आपकी गहराई, पहुँच, बकेट और लिफ्टिंग को कवर करे, वह न्यूनतम है।
  2. आपका गेट, जगह, ज़मीन और ट्रेलर जो सबसे बड़ी क्लास आने दें, वह अधिकतम है।
  3. इस दायरे में वह सबसे छोटी क्लास चुनें जो रोज़ की मात्रा पूरी करे।

बड़ा एक्सकेवेटर कब ग़लत चुनाव है?

"सुरक्षा के लिए बड़ी ही ले लो" एक आम ग़लती है। बड़ी मशीन काम बिगाड़ भी सकती है:

  • तंग नाली या छोटी साइट। मशीन मुड़ नहीं पाती, या ज़रूरत से चौड़ी कटाई कर देती है।
  • इमारत, सड़क या दीवार के पास। वज़न और कंपन से जोखिम बढ़ता है।
  • नरम या कमज़ोर ज़मीन। बड़ी मशीन ज़मीन पर और उसके नीचे दबी चीज़ों पर कुल मिलाकर ज़्यादा भार डालती है। चौड़े ट्रैक या मैट भार फैलाते हैं, पर ज़मीन कितना सह सकती है, यह साइट के मालिक या इंजीनियर से पूछें।
  • छोटा, कम दिन का काम। ट्रांसपोर्ट और उतारने में खुदाई से बचा समय ज़्यादा लग सकता है।

साइज़ मुख्य काम के हिसाब से चुनें, किसी एक असामान्य कदम (जैसे भारी लिफ्ट) के हिसाब से नहीं। छोटे काम में बैकहो लोडर से तुलना कर लें। अगर न्यूनतम क्लास अधिकतम से बड़ी निकले, तो तरीक़ा बदलें: छोटी मशीन के साथ क्रेन लें, काम बाँट दें, या रास्ता बेहतर करें।

Maedah पर यह कैसे करें

नई रिक्वेस्ट खोलें, एक्सकेवेटर की कैटेगरी चुनें, और नक्शे पर शहर और साइट डालें। विवरण में गहराई, सबसे तंग रास्ते की चौड़ाई, ट्रक का प्रकार और उठाने का कोई काम लिखें। तारीख़ें भरें।

सीलबंद कोटेशन अगल-बगल आते हैं। देखें कि हर सप्लायर कौन सी क्लास दे रहा है, उसमें क्या शामिल है, जवाब कितनी जल्दी आया और रेटिंग क्या है।

आम सवाल

घर की नींव के लिए कितने टन का एक्सकेवेटर चाहिए?

यह गहराई, रास्ते और हटाई जाने वाली मिट्टी की मात्रा पर निर्भर है। छोटे प्लॉट पर तंग गेट के साथ उथली स्ट्रिप फ़ाउंडेशन के लिए लगभग 6 टन तक की मिनी चल सकती है। ज़्यादा गहरी या लंबी नींव में मिडी क्लास, लगभग 6-15 टन, ठीक रहती है। बेसमेंट या दिन भर ट्रक भराई हो तो स्टैंडर्ड क्लास, लगभग 15-30 टन, की तरफ़ जाएँ। चार्ट को असली गहराई से ज़रूर मिलाएँ।

क्या एक्सकेवेटर को क्रेन की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं?

सिर्फ़ उस मॉडल के मेकर-चार्ट की सीमा में, और सिर्फ़ तब जब मेकर उठाने की इजाज़त देता हो। बूम, आर्म और लगे अटैचमेंट के साथ चार्ट बदल जाता है, इसलिए उसी मशीन का चार्ट सप्लायर से माँगें। अगर चार्ट आपके भार और दूरी को साफ़ कवर नहीं करता, तो क्रेन का इस्तेमाल करें।

ट्रांसपोर्टर को क्या जानकारी देनी चाहिए?

लोड के साथ मशीन का वज़न, और ट्रांसपोर्ट की चौड़ाई व ऊँचाई। लगी हुई बकेट या अटैचमेंट से वज़न बदलता है, इसलिए सप्लायर से इसकी पुष्टि कर लें। यह भी बताएँ कि मशीन कहाँ उतरेगी। उसके बाद ट्रांसपोर्टर ट्रेलर और रूट की किसी भी मंज़ूरी की पुष्टि करेगा।

मशीनें ढूँढें

इस गाइड में जिन मशीनों की बात हुई है, उन्हें देखें।

ये गाइड योजना बनाने में मदद के लिए सामान्य जानकारी देती हैं। ये इंजीनियरिंग, कानूनी या बीमा सलाह नहीं हैं। हमेशा निर्माता के निर्देशों, अपनी साइट के सुरक्षा नियमों, संबंधित अधिकारियों की शर्तों और अपनी बीमा कंपनी की ज़रूरतों का पालन करें।

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