मशीनें किराये पर लेना

रेंटल एग्रीमेंट चेकलिस्ट: साइन से पहले की शर्तें

साइन करने से पहले ये बातें लिखित में लें: मशीन का सही ब्योरा, साइट और तारीखें, रेट का आधार, कौन क्या देगा, सेफ्टी के कागज़, ख़राबी के नियम और किराया ख़त्म होने की शर्तें।

मुख्य बातें

  • मशीन, साइट और तारीखें साफ़ लिखवाएँ। सिर्फ़ "20 टन का एक्सकेवेटर" लिखना काफ़ी नहीं है।
  • रेट के साथ उसकी इकाई और काम के घंटे लिखें, और यह भी कि VAT शामिल है या नहीं।
  • ऑपरेटर, फ्यूल, ट्रांसपोर्ट और अटैचमेंट कौन देगा, यह साफ़ लिखें।
  • ख़राबी, नुकसान, कैंसलेशन, एक्सटेंशन और जल्दी वापसी की शर्तें मशीन चलने से पहले तय कर लें।
  • इस चेकलिस्ट को सवालों की सूची समझें, कानूनी सलाह नहीं।

आपने कोटेशन चुन लिया है और अब एग्रीमेंट साइन करना है, या व्हाट्सऐप पर "कन्फर्म" लिखना है? तब यह रेंटल एग्रीमेंट चेकलिस्ट खोलिए। शर्तें उस क्रम में हैं जिसमें वे काम आती हैं: डिलीवरी से पहले, किराये के दौरान, गड़बड़ी होने पर और मशीन लौटाते समय। हर शर्त के साथ सप्लायर से पूछने का एक सवाल भी है।

रेंटल एग्रीमेंट लिखित में क्यों ज़रूरी है?

किराये का एग्रीमेंट आपके और सप्लायर के बीच की सहमति है। बात अधूरी रहे तो दोनों पक्ष कमी को अपने अंदाज़े से भरते हैं। एक मानता है कि फ्यूल रेट में शामिल है, दूसरा नहीं मानता।

एग्रीमेंट लंबा होना ज़रूरी नहीं। छोटे और सीधे किराये के लिए 1 पेज का एग्रीमेंट, या ऐसी मैसेज-चैट जिसे दोनों पक्ष कन्फर्म करें, ठीक रहती है। शर्त इतनी है कि नीचे की हर बात का जवाब बाद में पढ़ा जा सके। शर्तें ऐसी भाषा में लिखें जो दोनों पढ़ते हों, और एक-एक कॉपी रखें।

नोट. बड़े या लंबे किराये में किसी जानकार व्यक्ति से एग्रीमेंट दिखवाइए। यह चेकलिस्ट सही सवाल पूछने में मदद करती है, उस समीक्षा की जगह नहीं लेती।

किराये का एग्रीमेंट: कौन, क्या और कहाँ

ये शर्तें डिलीवरी से पहले काम आती हैं। इनमें चूक हुई तो ग़लत मशीन पहुँचेगी, या कोई नहीं पहुँचेगी।

शर्तक्या लिखेंसप्लायर से पूछें
पक्षहर कंपनी का क़ानूनी नाम, कमर्शियल रजिस्ट्रेशन और VAT नंबर, और साइन करने का अधिकार किसे है"कौन-सी क़ानूनी इकाई साइन और इनवॉइस करेगी?"
मशीनमेक, मॉडल, साल, प्लेट या सीरियल नंबर"कौन-सी ख़ास मशीन आएगी?"
साइटपूरा पता, मैप लोकेशन और पहुँचने का रास्ता। ऊपर की बिजली लाइनों और ज़मीन के नीचे की सर्विसों की जाँच डिलीवरी से पहले होनी चाहिए; तय करें कि यह कौन करेगा"रास्ते की, और ज़मीन व जगह मशीन के लायक होने की पुष्टि कौन करेगा?"
तारीखेंशुरू की तारीख़ और समय की खिड़की, ख़त्म होने की तारीख़"अवधि कैसे गिनी जाएगी: कैलेंडर के दिन या काम के दिन?"
देर से डिलीवरीशुरू की तारीख़ का क्या होगा"मशीन देर से आई या नहीं आई तो शुरू की तारीख़ का क्या होगा और मेरे पास क्या विकल्प हैं?"
साइट में प्रवेशगेट पास, इंडक्शन या साइट मालिक के माँगे कागज़"आपके ड्राइवर या ऑपरेटर को अंदर आने के लिए कुछ चाहिए?"
संपर्कदोनों तरफ़ एक नामित व्यक्ति और फ़ोन नंबर"साइट पर मैं किसे फ़ोन करूँ, और आप किसे करेंगे?"

सबसे ज़रूरी सीरियल नंबर है। इससे छोटी या पुरानी मशीन चुपचाप बदल दिए जाने का जोखिम घटता है, और मशीन को उसके कागज़ों से मिलाया जा सकता है। हैंडओवर के वक़्त मशीन को चारों तरफ़ से फ़ोटो में उतारें और ऑवर मीटर भी दिखाएँ। क्या दर्ज करना है, यह हैंडओवर चेकलिस्ट में है।

रेट, घंटे और पेमेंट: पैसे से जुड़ी शर्तें

ये शर्तें किराये के दौरान और इनवॉइस आने पर काम आती हैं। रेट में क्या-क्या आ सकता है, इसकी पूरी सूची के लिए रेंटल रेट में क्या शामिल है और क्या नहीं पढ़ें।

इन बातों को लिखित में तय करें:

  • रेट और इकाई। रेट प्रति घंटा है, प्रति दिन, प्रति हफ़्ता या प्रति महीना?
  • काम के घंटे। एक दिन में कितने घंटे गिने जाएँगे? कौन-सा दिन काम का दिन माना जाएगा?
  • ओवरटाइम। तय घंटों के बाद का समय कैसे चार्ज होगा?
  • घंटे कैसे गिने जाएँगे। ऑवर मीटर से, दोनों पक्षों के रोज़ साइन किए टाइमशीट से, या साइट पर रहने के घंटों से? तय करें कि कौन-सा तरीक़ा चलेगा और रोज़ साइन कौन करेगा। पूछें: इनवॉइस किस रीडिंग या शीट से बनेगा?
  • खाली बैठा समय। जिन दिनों काम नहीं हुआ, जैसे मौसम या साइट की देरी से, क्या उनका चार्ज लगेगा?
  • VAT। रेट में शामिल है या ऊपर से जुड़ेगा? VAT के नियम ZATCA प्रकाशित करता है; शक हो तो अपने अकाउंटेंट से पूछें।
  • पेमेंट। कैसे और कब होगा: पहले, हर महीने या वापसी के बाद? किस दस्तावेज़ पर?

एक आम ग़लती है रोज़ के रेट की तुलना महीने के रेट से करना, यह देखे बिना कि दोनों में कितने घंटे जुड़े हैं।

ऑपरेटर, फ्यूल और ट्रांसपोर्ट: कौन क्या देगा

इनमें से हर चीज़ पहले ही दिन ख़र्च या देरी बन सकती है। हर मद के आगे एक नाम लिखें।

मदविकल्पपूछने का सवाल
ऑपरेटरसप्लायर का ऑपरेटर, या आपका अपना"ऑपरेटर शामिल है? रोज़ कितने घंटे के लिए?"
फ्यूलसप्लायर देगा, या आप"टैंक कौन भरेगा, और पैसे कौन देगा?"
ट्रांसपोर्टसप्लायर लाएगा और ले जाएगा, या आप इंतज़ाम करेंगे"क्या दोनों तरफ़ का ट्रांसपोर्ट शामिल है?"
अटैचमेंटबकेट, ब्रेकर, फोर्क, स्प्रेडर बार और ऐसे ही"मशीन के साथ कौन-से अटैचमेंट आएँगे?"
एक्सेसरीस्लिंग, शैकल, आउटरिगर पैड, चाबियाँ"डिलीवरी लिस्ट में ठीक-ठीक क्या है?"
रोज़ की देखभालआपकी टीम या सप्लायर की"तेल, पानी और ग्रीस की रोज़ जाँच कौन करेगा?"
इस्तेमाल की इजाज़तसिर्फ़ यही साइट और यही काम, या उससे ज़्यादा"सब-हायर या दूसरी साइट पर काम की इजाज़त है?"

अपना ऑपरेटर लाएँ तो सप्लायर से लिखित में पुष्टि लें कि ऑपरेटर मंज़ूर है और मशीन का इंश्योरेंस तब भी लागू रहेगा।

वेट हायर में आम तौर पर मशीन ऑपरेटर के साथ आती है, और ड्राई हायर में सिर्फ़ मशीन। कुछ सप्लायर "वेट" में फ्यूल भी गिनते हैं, इसलिए पूछें कि कोटेशन कौन-सा है और उसमें क्या शामिल है, फिर वह लिख लें। इसके लिए वेट हायर और ड्राई हायर में फ़र्क देखें।

सेफ्टी के कागज़, सर्टिफ़िकेट और इंश्योरेंस

जिन मशीनों की जाँच ज़रूरी होती है, जैसे क्रेन और दूसरे लिफ़्टिंग उपकरण, उनके लिए सप्लायर से मौजूदा इंस्पेक्शन सर्टिफ़िकेट माँगें। उसकी एक्सपायरी की तारीख़ लिख लें। यह भी तय करें कि किराये के बीच में वह ख़त्म हो गया तो क्या होगा: नई जाँच कौन करवाएगा, और वैध सर्टिफ़िकेट आने तक मशीन बंद रहेगी।

इसके अलावा ये भी माँगें:

  • ऑपरेटर का लाइसेंस या योग्यता के कागज़, जब ऑपरेटर सप्लायर दे रहा हो। क्रेन या दूसरे लिफ़्टिंग काम में यह भी पूछें कि लिफ़्ट प्लान कौन बनाएगा।
  • साइट मालिक की ज़रूरतें। ये प्रोजेक्ट, साइट मालिक, म्युनिसिपैलिटी और इंश्योरर के हिसाब से अलग होती हैं। मशीन भेजे जाने से पहले इनकी पुष्टि कर लें।
  • वे मैनुअल या लोड चार्ट जो मशीन के साथ रहने चाहिए।

फिर तय करें कि मशीन के नुकसान, खो जाने या चोरी, और तीसरे पक्ष के दावों की ज़िम्मेदारी किसकी होगी। पूछें कि दोनों पक्षों के पास कौन-सा इंश्योरेंस है, और इंश्योरर से सीधे पूछें कि मशीन आपकी साइट पर होने के दौरान क्या कवर है। क्या पूछना है, यह मशीन आने से पहले इंश्योरेंस के सवाल में दिया है।

मशीन ख़राब हो जाए या टूट-फूट हो, तो क्या होगा?

  1. जवाब देने की गति। ख़राबी की सूचना पर सप्लायर को कितनी जल्दी जवाब देना होगा? किसे फ़ोन करना है, और किन घंटों में?
  2. रिप्लेसमेंट। क्या सप्लायर दूसरी मशीन देगा? कितनी जल्दी, और उसी तरह की?
  3. किराये का समय। मशीन बंद रहने पर क्या रेट तब भी लगेगा? किस घंटे से रुकेगा?
  4. कारण। ख़राबी घिसाई से है या ग़लत इस्तेमाल से, यह कौन तय करेगा? सबूत क्या होंगे, जैसे फ़ोटो और ऑपरेटर की रिपोर्ट?
  5. सूचना। ख़राबी की सूचना कैसे दी जाएगी (फ़ोन, मैसेज, किसे), और क्या वह मैसेज आधिकारिक रिपोर्ट माना जाएगा?

साइट पर क्या-क्या करना है, यह किराये की मशीन ख़राब हो जाए तो क्या करें में है।

कैंसलेशन, एक्सटेंशन, जल्दी वापसी और विवाद

इन्हें मशीन चलने से पहले तय कर लें। एक बार मशीन साइट पर पहुँच गई तो इन पर सहमति बनाना मुश्किल हो जाता है।

  • कैंसलेशन। क्या डिलीवरी से पहले रद्द कर सकते हैं, और कुछ चार्ज लगेगा?
  • न्यूनतम किराया। क्या कोई न्यूनतम अवधि है? काम जल्दी निपट गया तो क्या होगा?
  • एक्सटेंशन। कितने दिन पहले बताना होगा? रेट वही रहेगा, और क्या मशीन तब तक खाली मिलेगी?
  • जल्दी वापसी। क्या मशीन जल्दी लौटा सकते हैं, और क्या अवधि का कुछ हिस्सा फिर भी चार्ज होगा?
  • डिपॉज़िट। क्या ज़रूरी है? कब और कैसे लौटेगा, और उसमें से क्या कट सकता है?
  • वापसी की हालत। मशीन किस हालत में, कितने फ्यूल और कितनी सफ़ाई के साथ लौटानी है?
  • वापस ले जाना। मशीन कौन उठाएगा, और किराया कहाँ बंद माना जाएगा: साइट पर या यार्ड में?
  • बदलाव। अतिरिक्त दिन, नई साइट या एक और अटैचमेंट जैसा बदलाव दोनों तरफ़ कौन मंज़ूर कर सकता है? हर बदलाव लिखित में कन्फर्म करें।
  • विवाद। सबसे पहले किससे बात करें, और असहमति कैसे उठाई जाएगी?

इनमें से हर एक का ब्योरा डिपॉज़िट, एक्सटेंशन और जल्दी वापसी में है।

Maedah पर यह कैसे करें

रिक्वेस्ट डालते समय मशीन, संख्या, शहर, मैप पर साइट और तारीखें भरें। ड्राइवर, इंश्योरेंस या TÜV इंस्पेक्शन जैसी शर्तें भी जोड़ सकते हैं।

कोटेशन आएँ तो उन्हें आमने-सामने रखकर देखें कि हर सप्लायर ने क्या शामिल किया है। इस गाइड के सवाल चैट में पूछें। कोटेशन स्वीकार करते ही बुकिंग बन जाती है और बाकी कोटेशन बंद हो जाते हैं। Maedah न पेमेंट प्रोसेस करता है, न एग्रीमेंट लिखता है: शर्तें और पेमेंट आप सप्लायर से ही तय करते हैं।

आम सवाल

क्या मशीन किराये पर लेने के लिए लंबा एग्रीमेंट ज़रूरी है?

नहीं। छोटे और सीधे किराये के लिए 1 पेज का एग्रीमेंट काफ़ी हो सकता है, अगर दोनों पक्ष उसे मान लें: पक्ष, मशीन का सही ब्योरा, साइट, तारीखें, रेट का आधार और कौन क्या देगा। उसे ऐसी भाषा में लिखें जो दोनों पढ़ते हों। लंबे, ऊँची क़ीमत वाले या लिफ़्टिंग के किराये में किसी जानकार व्यक्ति से एग्रीमेंट दिखवाएँ। ज़बानी वादे से लिखी हुई शर्त ज़्यादा भरोसेमंद होती है।

रेंटल एग्रीमेंट चेकलिस्ट में सबसे पहले क्या होना चाहिए?

बुनियादी बातों से शुरू करें: दोनों के क़ानूनी नाम, मशीन का मेक, मॉडल, साल और प्लेट या सीरियल नंबर, साइट का पता, तारीखें और हर तरफ़ एक संपर्क व्यक्ति। इन्हीं से तय होता है कि सही मशीन सही जगह पहुँचेगी या नहीं। उसके बाद पैसे की शर्तें जोड़ें, फिर यह कि ऑपरेटर, फ्यूल और ट्रांसपोर्ट कौन देगा, और आख़िर में सेफ्टी के कागज़।

किराये की मशीन को नुकसान हो तो भरपाई कौन करता है?

यह इस पर निर्भर है कि आपने और सप्लायर ने क्या तय किया, और दोनों के पास कौन-सा इंश्योरेंस है। नुकसान, खो जाने और तीसरे पक्ष के दावों की ज़िम्मेदारी किसकी है, यह लिखित में तय करें। फिर इंश्योरर से पूछें कि आपकी साइट पर क्या कवर है। बिना पूछे यह न मानें कि सप्लायर का कवर आपके ऑपरेटर या आपकी साइट पर भी लागू होगा।

क्या सिर्फ़ मैसेज पर किराया कन्फर्म किया जा सकता है?

कई लोग ऐसा करते हैं, और साफ़ मैसेज-चैट से लिखित रिकॉर्ड मिल जाता है। वह दोनों पक्षों पर बाध्यकारी है या नहीं, यह तथ्यों और क़ानून पर निर्भर है। इसलिए लंबे, ऊँची क़ीमत वाले या लिफ़्टिंग के किराये में साइन किया दस्तावेज़ लें या किसी जानकार से पूछें। मशीन, साइट, तारीखें, रेट का आधार और शामिल चीज़ों का छोटा सार भेजें और सप्लायर से "सहमत" लिखवाएँ। पूरी चैट सँभालकर रखें। ओवरटाइम या ख़राबी जैसी कोई शर्त छूटी हो तो मशीन भेजे जाने से पहले माँग लें।

मशीनें ढूँढें

इस गाइड में जिन मशीनों की बात हुई है, उन्हें देखें।

ये गाइड योजना बनाने में मदद के लिए सामान्य जानकारी देती हैं। ये इंजीनियरिंग, कानूनी या बीमा सलाह नहीं हैं। हमेशा निर्माता के निर्देशों, अपनी साइट के सुरक्षा नियमों, संबंधित अधिकारियों की शर्तों और अपनी बीमा कंपनी की ज़रूरतों का पालन करें।

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